आजु मेरे धाम आए री नागर नंद किसोर।धन्य दिवस धन घरी री सजनी, धन्य भाग सखि मोर॥मंगल गावौं चौक पुरावों बंदनवार सजावौं पौर।नंददास प्रभु कहुं रस बस करि भागन आवत कबहूं भोर॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+