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डोल झुलावत सब ब्रज सुंदरि

पद · लगभग २ मिनट
डोल झुलावत सब ब्रज सुंदरि, झूलत मदन गुपाल।गावत फागु धमार हरखि भरि हलधर औ सब ग्वाल।फूले कमल, केतकी कुंजन गुंजत मधुप रसाल।चंदन बंदन चोवा छिरकति उड़त अबीर-गुलाल।बाजत बैनु, बिषान, बांसुरी, डफ, मृदंग, अठताल।नंददास प्रभु के संग बिलसति, पुन्न-पुंज ब्रजबाल॥

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