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हाशिया
कविता
कबीर कठिनाई खरी सुमिरतां हरि नाम
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
कबीर कठिनाई खरी सुमिरतां हरि नाम।
सूली ऊपरि नट विद्या, गिरूं त नहीं ठाम॥२९॥
॥
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कबीर एक न जाँणियाँ, तौ बहुजाँण्याँ क्या होइ
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कबीर कलि खोटी भई, मुनियर मिलै न कोइ
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