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कोउक निंदत कोउक बंदत

सवैया · लगभग २ मिनट
कोउक निंदत कोउक बंदत कोउक आइकै दैत है भक्षन।कोउक आइ लगावत चंदन कोउक डारत धूरि ततक्षन॥कोउ कहै यह मूरख दीसत कोउ कहै यह आहि विचक्षन।सुंदर काहु सौं राग न द्वेष सु ये सब जानहुं साधु के लक्षन॥

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