मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
महिं नभ सर पंजर कियो, रहिमन बल अवसेष
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
महिं नभ सर पंजर कियो, रहिमन बल अवसेष।
सो अरजुन बैराट घर, रहे नारि के भेष॥१३५॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
मन्दन के मारेहु गए, औगुन गनि न सिराहिं
अगला
माँगे घटत रहीम पद, कितो करो बढ़ि काम
अब कुछ और पढ़ें
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
कविता
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
२ मिनट का पाठ
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
कविता
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
२ मिनट का पाठ