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रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं

सोरठा · लगभग २ मिनट
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं।ताहू मैं परतीति, जहाँ गाँठि तहँ रस नहीं॥११॥

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