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हाशिया
कविता
ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों
रहीम
सोरठा · लगभग २ मिनट
ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों।
तातो जारै अंग, सीरे पै कारो करै॥२॥
॥
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अ−
अ+
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इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
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गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
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होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
२ मिनट का पाठ
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
कविता
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
२ मिनट का पाठ
हरुए गवन नबेलिआ, डीठि बचाइ
रहीम
कविता
हरुए गवन नबेलिआ, डीठि बचाइ
रहीम
२ मिनट का पाठ