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हाशिया
कविता
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
सोरठा · लगभग २ मिनट
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै।
कबहुँ न भई सरीर, प्रीति बेदना एक-सी॥१॥
॥
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ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों
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रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
कविता
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
२ मिनट का पाठ
सुनि धुनि कान मुरलिआ, रागन-भेद
रहीम
कविता
सुनि धुनि कान मुरलिआ, रागन-भेद
रहीम
२ मिनट का पाठ