रन बन ब्याधि बिपत्ति मैं, रहिमन मरै न रोइ।जो रच्छक जननी-जठर, सो हरि गए कि सोइ॥२२६॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
पलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीमकवितापलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीम२ मिनट का पाठ