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रन बन ब्याधि बिपत्ति मैं, रहिमन मरै न रोइ

दोहा · लगभग २ मिनट
रन बन ब्याधि बिपत्ति मैं, रहिमन मरै न रोइ।जो रच्छक जननी-जठर, सो हरि गए कि सोइ॥२२६॥

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