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यों रहीम सुख होत है, बढ़त देखि निज गोत

दोहा · लगभग २ मिनट
यों रहीम सुख होत है, बढ़त देखि निज गोत।ज्यों बड़री अँखियाँ निरखि, आँखिन को सुख होत॥१५०॥

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