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मन पछितैहै अवसर बीते

पद · लगभग २ मिनट
मन पछितैहै अवसर बीते।दुरलभ देह पाइ हरिपद भजु, करम, बचन अरु ही ते ॥ १ ॥सहसबाहु दसबदन आदि नृप बचे न काल बलीते।हम-हम करि धन-धाम सँवारे, अंत चले उठि रीते ॥ २ ॥सुत बनितादि जानि स्वारथरत, न करु नेह सबही ते।अंतहु तोहिं तजैंगे पामर! तू न तजै अबही ते ॥ ३ ॥अब नाथहिं अनुरागु, जागु जड़, त्यागु दुरासा जी ते।बुझे ---- काम अगिनि तुलसी कहुँ, बिषय-भोग बहु घी ते ॥ ४ ॥कि

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