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जानि अनीतिहिं जो करै, जागत ही रह सोइ

दोहा · लगभग २ मिनट
जानि अनीतिहिं जो करै, जागत ही रह सोइ।ताहि जगाइ बुझाइबो, रहिमन उचित न होइ॥५६॥

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