मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
सुंदर जीतै सो सही, डाव बिचारै कोइ
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुंदर जीतै सो सही, डाव बिचारै कोइ।
गाफिल होइ सु हारि कै, चालै सरबस खोइ॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
ज्यौं हीं आवै राम मन, सुन्दर त्यौं ही धारि
अगला
पहराइत घर कौं मुसै, साह न जांने कोइ
अब कुछ और पढ़ें
भई हौं अति बावरी बिरह घेरी बावरी
सुंदरदास
कविता
भई हौं अति बावरी बिरह घेरी बावरी
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
मात पिता सुत भाई बंध्यौ
सुंदरदास
कविता
मात पिता सुत भाई बंध्यौ
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
कामिनी कौ अंग अति मलिन महा अशुद्ध
सुंदरदास
कविता
कामिनी कौ अंग अति मलिन महा अशुद्ध
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ