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कबीर निरभै रामजपि, जय लग दीवै वाति

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर निरभै रामजपि, जय लग दीवै वाति ।तेल घट्या बाती बुझी, (तय) सोवेगा दिन राति ॥१०॥

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