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जनक बचन निदरत निडर, बसत कुसंगति माहिं

दोहा · लगभग २ मिनट
जनक बचन निदरत निडर, बसत कुसंगति माहिं।मूरख सो सुत अधम है, तेहि जनमे सुख नाहिं॥

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