उद्यम में निद्रा नहीं, नहिं सुख दारिद माहिंगिरिधारनकविताउद्यम में निद्रा नहीं, नहिं सुख दारिद माहिं
२ मिनट का पाठ
लेखक के साथ
कहानियाँ, कविताएँ और विचार—अपने मन के साथ पढ़िए।
३१ रचनाएँ

उद्यम में निद्रा नहीं, नहिं सुख दारिद माहिंगिरिधारनकविता
सकल वस्तु संग्रह करै, आवै कोउ दिन कामगिरिधारनकविता
लोभ सरिस अवगुन नहीं, तप नहिं सत्य समानगिरिधारनकविता
लोभ न कबहूं कीजिये, या में विपति अपारगिरिधारनकविता
सुख में संग मिलि सुख करै, दुख में पाछो होयगिरिधारनकविता
उद्यम कीजै जगत में, मिले भाग्य अनुसारगिरिधारनकविता
अति चंचल नित कलह रुचि, पति सों नाहिं मिलापगिरिधारनकविता
आप करै उपकार अति, प्रति उपकार न चाहगिरिधारनकविता
सासु पासु जोहत खरी, आँखि आँसु उर लाजुगिरिधारनकविता
रूपवती लज्जावती, सीलवती मृदु बैनगिरिधारनकविता
मिल्यो रहत निज प्राप्ति हित, दगा समय पर देतगिरिधारनकविता
धनहिं राखिये विपति हित, तिय राखिय धन त्यागिगिरिधारनकविता
सुख दुख अरु विग्रह विपति, यामे तजै न संगगिरिधारनकविता
पति देवत कहि नारि कहँ, और आसरो नाहिंगिरिधारनकविता
जनक बचन निदरत निडर, बसत कुसंगति माहिंगिरिधारनकविता
पुन्य करिय सो नहिं कहिय, पाप करिय परकासगिरिधारनकविता
मन सों जग को भल चहै, हिय छल रहै न नेकगिरिधारनकविता
केसर सो रँग चोवा से केशगिरिधारनकविता
गोप सबै मिलि गौकुल केगिरिधारनकविता
खेलत खेल झमेलन मेंगिरिधारनकविता
दुख दूर भयो अरी ग्रीष्म कोगिरिधारनकविता
ग्वाल अनेक सवाँग किये सँगगिरिधारनकविता
फागुन की उजियारी एकादशीगिरिधारनकविता
नौल निकुंज बनो रसपुंजगिरिधारनकविता
लाल गुलाल समेत अरीगिरिधारनकविता
खेलन में रस मेलन मेंगिरिधारनकविता
अनुराग गुलाल उंड़ाय सबैगिरिधारनकविता
रस खेल में रेल में रंगन कीगिरिधारनकविता
चोवाके मेघ गुलाल की दामिनीगिरिधारनकविता
बातनि सों समुझावति हौ मोहिंगिरिधारनकविता
आजु अलबेली अलबेले संग रंगधामगिरिधारनकविता