उद्यम में निद्रा नहीं, नहिं सुख दारिद माहिं।लोभी उर संतोष नहिं, धीर अबुध में नाहिं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
जनक बचन निदरत निडर, बसत कुसंगति माहिंगिरिधारनकविताजनक बचन निदरत निडर, बसत कुसंगति माहिंगिरिधारन२ मिनट का पाठ
पुन्य करिय सो नहिं कहिय, पाप करिय परकासगिरिधारनकवितापुन्य करिय सो नहिं कहिय, पाप करिय परकासगिरिधारन२ मिनट का पाठ