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यह न रहीम सराहिए, लेन-देन की प्रीति

दोहा · लगभग २ मिनट
यह न रहीम सराहिए, लेन-देन की प्रीति।प्रानन बाजी राखिए, हारि होइ कै जीति॥१४४॥

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