मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

कबीर अपने जीव तैं, ऐ दोइ वार्तें धोइ

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर अपने जीव तैं, ऐ दोइ वार्तें धोइ।लोभ बढ़ाई कारणैं, अछता मूल न खोइ॥४१॥

अब कुछ और पढ़ें