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जनम गयो बादिहिं बर बीति

पद · लगभग २ मिनट
जनम गयो बादिहिं बर बीति।परमारथ पाले न पर् यो कछु, अनुदिन अधिक अनीति ॥ १ ॥खेलत खात लरिकपन गो चलि, जौबन जुवतिन लियो जीति।रोग-बियोग-सोग-श्रम-संकुल बड़ि बय बृथहि अतीति ॥ २ ॥राग-रोष-इरिषा-बिमोह-बस रुची न साधु-समीति।कहे न सुने गुनगन रघुबरके, भइ न रामपद-प्रीति ॥ ३ ॥हृदय दहत पछिताय-अनल अब, सुनत दुसह भवभीति।तुलसी प्रभु तें होइ सो कीजिय समुझि बिरदकी रीति ॥ ४ ॥

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