यमुना पर तन मन प्राण वारों।जाकी कीर्ति विशद कौन अब कहि सके ताहि, नैनन ते नेकु न टारों॥चरण कमल इनके जो चिंतत रहों निसि दिन नाम मुख तें उचारों।‘कुंभनदास’ कहे लाल गिरिधर मुख इनकी कृपा भई तो निहारों॥

यमुना पर तन मन प्राण वारों
कुंभनदासपद · लगभग २ मिनट