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पहिले घनआनंद सींचि सुजान

सवैया · लगभग २ मिनट
पहिले घनआनंद सींचि सुजान कहीं बतियाँ अति प्यार पगी।अब लाय वियोग की लाय बलाय, बढ़ाय बिसास दगानि दगी।अँखियाँ दुखियानि कुदानि परी, न कहुँ लगैं कौन घरी सु लगी।मति दौरि थकी, न लहै ठिक ठौर, अमोही के मोह-मिठामठगी॥

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