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रहिमन निज मनकी बिथा, मन ही राखौ गोय

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन निज मनकी बिथा, मन ही राखौ गोय।सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥१६८॥

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