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हाशिया
कविता
रहिमन धोखे भाव ते, मुख तैं निकसत राम
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन धोखे भाव ते, मुख तैं निकसत राम।
पावत पूरन परम गति, कामादिक को धाम॥१७७॥
॥
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रहिमन धागा प्रेम को, मति तोरो चटकाइ
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रहिमन निज मनकी बिथा, मन ही राखौ गोय
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रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन कीन्ही प्रीत, साहब को भावै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन पुतरी स्याम, मनौ जलज मधुकर लसै
रहीम
कविता
रहिमन पुतरी स्याम, मनौ जलज मधुकर लसै
रहीम
२ मिनट का पाठ