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रहिमन धागा प्रेम को, मति तोरो चटकाइ

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन धागा प्रेम को, मति तोरो चटकाइ।टूटे से फिरि ना मिलै, मिले गाँठि परि जाइ॥१८८॥

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