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हाशिया
कविता
जो नृप बासर निसि कहै, तौ कचपची देखाउ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
जो नृप बासर निसि कहै, तौ कचपची देखाउ।
रहिमन जो रहिबो चहौ, कहौ उसी को दाँउ॥७७॥
॥
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जो घरही मैं घुसि रहैं, कदली सुवन सुडील
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जो पुरुषारथ ते कहूँ, सम्पति मिलति रहीम
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हँसि-हँसि हेरि अरसिआ, सहज सिंगार
रहीम
कविता
हँसि-हँसि हेरि अरसिआ, सहज सिंगार
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
कविता
सेज बिछाइ पलँगिआ, अंग सिंगार
रहीम
२ मिनट का पाठ