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कागद केरो नाॅव री, पांणी केरी गंग

साखी · लगभग २ मिनट
कागद केरो नाॅव री, पांणी केरी गंग।कहै कबीर कैसे तिरूँ, पंच कुसंगी संग॥२१॥

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