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हाशिया
कविता
सुन्दर काल महाबली, मारे मोटे मीर
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर काल महाबली, मारे मोटे मीर।
तूं कौनैं की गनति मैं, चेतत काहि न बीर॥
॥
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सिंह मांहिं है सिंह सौ, स्याल मांहिं पुनि स्याल
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सुंदर ठगबाजी जगत, यह निश्चय करि जांनि
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