है प्रभु ! मेरोई सब दोसु ।सीलसींधु कृपालु नाथ अनाथ आरत-पोसु ॥ १ ॥बेष बचन बिराग मन अघ अवगुननिको कोसु ।राम प्रीती प्रतीति पोली, कपट-करतब ठोसु ॥ २ ॥राग-रंग कुसंग ही सों, साधु-संगति रोसु ।चहत केहरि-जसहिं सेइ सृगाल ज्यों खरगोसु ॥ ३ ॥संभु-सिखवन रसन हूँ नित राम-नामहिं घोसु ।दंभहू कलि नाम कुंभज सोच-सागर-सोसु ॥ ४ ॥मोद-मंगल-मूल अति अनुकूल निज निरजोसु ।रामनाम प्रभाव सुनि तुलसिहुँ परम परितोसु ॥ ५ ॥

है प्रभु ! मेरोई सब दोसु
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट