सुंदर सिला खेल की ठौर।मदन गोपाल जहां मध्य नाइक चहुं दिसि सखा मंडली और॥बांटत छाक गोवर्धन ऊपर बैठत नाना बहु विधि चौर।हंसि हंसि भोजन करत परस्पर चाखि लै मांग कौर॥कबहूँ बोलत गांइ सिखर’ चढ़ि लै-लै नाम घूमरी घौर।‘चतुर्भुज’ प्रभुलीला रस रीझत गिरिधरलाल रसिक सिरमौर॥

सुंदर सिला खेल की ठौर
चतुर्भुजदासपद · लगभग २ मिनट