हरि कौ बिलोवनो विलोइ मेरी माई,ऐसै बिलोइ जैसे तत न जाई॥ टेक॥तन करि मटकी मननि बिलोइ, ता मटकी मैं पवन समोइ।इला पयंगुला सुषमन नारी, बेगि विलोइ ठाढी छलिहारी॥कहै कबीर गुजरी बौरांनी, मटकी फूटी जोतिं समानी॥354॥

हरि कौ बिलोवनो विलोइ मेरी माई
कबीरपद · लगभग २ मिनट