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हाशिया
कविता
तेरी मुख-समता करी, साहस करि निरसंक
मतिराम
दोहा · लगभग २ मिनट
तेरी मुख-समता करी, साहस करि निरसंक।
धूरि परी अरबिंद मुख, चंदहि लग्यौ कलंक॥
॥
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फूलति कली गुलाब की, सखि यहि रूप लखै न
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मतिराम
कविता
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मतिराम
कविता
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मतिराम
कविता
प्रानपियारो मिल्यो सपने में
मतिराम
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