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सार सुख पाइये रे, रंगि रमहु आत्माँराँम

पद · लगभग २ मिनट
सार सुख पाइये रे, रंगि रमहु आत्माँराँम॥ टेक॥बनह बसे का कीजिये, जे मन नहीं तजै बिकार।घर बन तत समि जिनि किया ते बिरला संसार॥का जटा भसम लेपन किये, कहा गुफा मैं बास।मन जीत्या जग जीतिये, जौ बिषया रहै उदास॥सहज भाइ जे ऊपजै, ताका किसा माँन अभिमान।आपा पर समि चीनियैं, तब मिलै आतमां राम॥कहै कबीर कृपा भई, गुर ग्यान कह्या समझाइ।हिरदै श्री हरि भेटियै, जे मन अनतै नहीं जाइ॥300॥

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