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हाशिया
कविता
करत निपुनई गुन बिना, रहिमन गुनी हजूर
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
करत निपुनई गुन बिना, रहिमन गुनी हजूर।
मानौं टेरत बिटप चढ़ि, यहि समान हम कूर॥२१॥
॥
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पिछला
कमला थिर न रहीम कहि, लखत अधम जे कोय
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करम-हीन रहिमन लखौ, धँसो बड़े घर चोर
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सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
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रहीम
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रहीम
कविता
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रहीम
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