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उद्धव का ब्रज में आना

पद · लगभग २ मिनट
उद्धव का ब्रज में आनाराग मलारकोऊ आवत है तन स्याम।वैसेइ पट, वैसिय रथ-वैठनि, वैसिय है उर दाम॥जैसी हुतिं उठि तैसिय दौरीं छाँड़ि सकल गृह-काम।रोम पुलक, गदगद भई तिहि छन सोचि अंग अभिराम॥इतनी कहत आय गए ऊधो, रहीं ठगी तिहि ठाम।सूरदास प्रभु ह्याँ क्यों आवै बंधे कुब्जा-रस स्याम॥१३॥

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