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फील रबाबी बलुद पखावज कौआ ताल बजावै

पद · लगभग २ मिनट
फील रबाबी बलुद पखावज कौआ ताल बजावै।पहरि चोलना गदहा नाचै भैसा भगति करावै॥राजा राम क करिया बरपे काये। किनै बूझन हारे खाय॥बैठि सिंघ घर पान लगावहिं घीस गल्योरे लावै॥घर घर मुसरी मंगल गावहि कछुआ संख बजावै॥बंस को पूत बिआहन चलिया सुइने मंडप छाये॥रूप कन्निया सुंदर बेधी ससै सिंह गुन गाये॥कहत कबीर सुनहु रे पंडित कीटी परबत खाया॥कछुआ कहै अंगार भिलोरौ लूकी सबद सुनाया॥142॥

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