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हाशिया
कविता
रहिमन दानि दरिद्र तर, तऊ जाँचिबै जोग
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन दानि दरिद्र तर, तऊ जाँचिबै जोग।
ज्यों सरितन सूखा परे, कुवाँ खनावत लोग॥१७३॥
॥
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रहिमन थोरे दिनन को, कौन करै मुख स्याह
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रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि
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रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
२ मिनट का पाठ
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
२ मिनट का पाठ