बंदे दुनिया को दीन गंवाया।सो दुनिया तेरे संग न लागी, मूड़ अजाब चढ़ाया॥क़मर जो लोगा बदी ख़लक़ की, किन तुझको फर्माया।गुनहगार तू हुआ सरासर, दोज़ख़ बांध चलाया॥ख़ाक सेती जिन पैदा कीन्हा, सो साहेब बिसराया।मोहकम मार पड़ी गुरजन की, तब कछु ज्वाब न आया॥अब किसहूँ को दोष न दीजै, गंदा अमल कमाया।कह मलूक जस ख़िदमत पहुँचा, सोई नतीजा पाया॥

बंदे दुनिया को दीन गंवाया
मलूकदाससबद · लगभग २ मिनट