चारु सुवास-भरी रस रास प्रकास मई सुचि है रुचि घेरो।श्री को अबास धरे सुख आस करें पिय के चखभौंर बसेरो।गोकुल राग सोहाग सुनो लहि जोबन सूर सहायक नेरो।फूलभरो निसि द्यौस रहै मनभावति जू मुख पंकज तेरो॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+