फागुन में मधु माधव में अरुगोकुलनाथकविताफागुन में मधु माधव में अरु
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४८ रचनाएँ

फागुन में मधु माधव में अरुगोकुलनाथकविता
पियरी पगिया पर मोरपखागोकुलनाथकविता
ओप भरे हैं कछू उभरे हैंगोकुलनाथकविता
प्रीतम के चख चारु चकोरनगोकुलनाथकविता
पंकज पायन से कहियै कटिगोकुलनाथकविता
दानव दुज्जन के निकटौगोकुलनाथकविता
कौल से कोमल हैं इन पैगोकुलनाथकविता
वै उनसों रति को उमहैं फिरिगोकुलनाथकविता
डोलि परै मग में पग रीगोकुलनाथकविता
वा दिन कालिंदी-कूल पै न्हातगोकुलनाथकविता
आलस-भार भरे बिलसैं अँगगोकुलनाथकविता
सब राति जगी रति रंग में अंगनगोकुलनाथकविता
इंदु बधू गन पंकज पैगोकुलनाथकविता
पाइन पीडुरी जंघ नितंबगोकुलनाथकविता
पेंच खुले पगरी के उड़ैं फिरैं कुंडल कीगोकुलनाथकविता
राजति चारुन रोमावली सोगोकुलनाथकविता
पान किए हूं दवानल कों जेहिगोकुलनाथकविता
राति कहूँ बहु कै रतिरंगगोकुलनाथकविता
रूप भरी तरुनी तिन की लखिगोकुलनाथकविता
काम सतावतु है उनको छनगोकुलनाथकविता
कुंकुम राग परागभरी कछूगोकुलनाथकविता
चमकै चपला झमकै जुगुनूगोकुलनाथकविता
हाट सी लागति भौंरन कीगोकुलनाथकविता
चारु सुवास-भरी रस रासगोकुलनाथकविता
देखत ही हरि को पटओटगोकुलनाथकविता
नैन भरैं अँसुवानि ढरैंगोकुलनाथकविता
आई तरुनाई ओप औरे अंग छाई तेरेगोकुलनाथकविता
कटै त्रय ताप दाप व्यापै भवभय की नगोकुलनाथकविता
जानि मुखचंद चहूँ ओर तें चकोर दौरैंगोकुलनाथकविता
सिंदूर भरी भसुंड एकदंत सोहै मानोगोकुलनाथकविता
पंकज से पानि पाय चंद्रमा सो चारु मुखगोकुलनाथकविता
पग पानि सोहे पंकज न पेखियत कहागोकुलनाथकविता
सासन सों पिता के सिंघासन सो त्यागि आइगोकुलनाथकविता
अंग अलसाने पियराने थहराने पगगोकुलनाथकविता
दारिद दरन भव-भय उधरन चारुगोकुलनाथकविता
फूल सों भरी है चारु चारुता हरी हैगोकुलनाथकविता