वा दिन कालिंदी-कूल पै न्हात लख्यौ मुख रावरे रूप अमंदहि।ता दिन तें कुछ ऐसी लसी है दसा जी बसी है गसे नंदनंदहि।गोकुल भूल भरे से रहैं न चहैं खिन खेलन के फरफंदहि।द्यौस में पंकज पेखो करैं सजनी रजनी भरि देखत चंदहि॥

वा दिन कालिंदी-कूल पै न्हात
गोकुलनाथसवैया · लगभग २ मिनट