आलस-भार भरे बिलसैं अँग गोकुल नैननि नींद भरी त्यौं।सोइ गई रति कंत सों कै थकि सो छवि आइ लखै न अरी क्यौं।रोमावली तिय की कुच-बीच लसै श्रमवारि के बुंदभरी यौं।है कनकाचलसानु के मध्य सिँगार-लता मुकुतान फरी ज्यौं॥

आलस-भार भरे बिलसैं अँग
गोकुलनाथसवैया · लगभग २ मिनट