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पाइन पीडुरी जंघ नितंब

सवैया · लगभग २ मिनट
पाइन पीडुरी जंघ नितंब भरी बिधि लंक लोनाई हितै कै।नाभिथली बलि रोमवली कुच कुंभनि के करिकुंभ जितै कै।गोकुल पानि भुजानि लखे मुख नैनन देत अमी अमितै कै।क्यौं बस होहि न भावती जू मन भाव तो रावरो रूप चितै के॥

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