मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

नैन भरैं अँसुवानि ढरैं

सवैया · लगभग २ मिनट
नैन भरैं अँसुवानि ढरैं तन कंपत ख़ास बढ़ी निरसै है।सूखि रह्यौ मुख पीरी परी अँग खेद भरी सी छुये तपतैं है।गोकुल छोड़ि भली हौं गई हौ लली अबहीं न गयो पल है है।चैन की कौन करै चरचा सुनि ऐसे ही ग्वाल गँवार जो गैहै॥

अब कुछ और पढ़ें