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ओप भरे हैं कछू उभरे हैं

सवैया · लगभग २ मिनट
ओप भरे हैं कछू उभरे हैं करी बिधि आपने हाथ सँवारे।गोकुल रोमवली सों खिले अलि की अवलीन को हैं प्रनधारे।चारु सुगंध सने सुखमा सुचि रंग-रँगे सुकुमारता भारे।कौल-कलीन के हार मिले न लली लखि जात उरोज तिहारे॥

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