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पान किए हूं दवानल कों जेहि

सवैया · लगभग २ मिनट
पान किए हूँ दवानल कों जेहि को अधरा रस नाहिं डढ़ै री।ताके लगी मुख सी यह जाइ तौ ज्वाल सी ताननि क्यों न गढ़ै री।गोकुलनाथ के हाथ बसौ है बिसासिनि नाथिबे ही की कढ़ै री।छेदति या हिय कों बँसुरी सखि पाहन फोरि कै बाँस कढ़ै री॥

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