दानव दुज्जन के निकटौ बसिबो न भलो यह मंत्र अराधौ।संगति दोस परोस लहौ दुख पावत पापिन के सँग साधौ।गोकुलनाथ तिहूँ पुर के यह राम को काम बिचारि कै काधौ।सौ यह लै दसकंध गयो है बिरोध बिनाहौं समुद्दर बांधौ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+