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नहिं रहीम कछु रूप गुन, नहिं मृगया अनुराग

दोहा · लगभग २ मिनट
नहिं रहीम कछु रूप गुन, नहिं मृगया अनुराग।देसी स्वान जो राखिए, भ्रमत भूख ही लाग॥१०१॥

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