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हाशिया
कविता
याते जान्यो मन भयो, जरि बरि भस्म बनाइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
याते जान्यो मन भयो, जरि बरि भस्म बनाइ।
रहिमन जाहि लगाइए, सो रूखो ह्वै जाइ॥१४७॥
॥
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यह रहीम मानै नहीं, दिलते नवा जो होइ
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ये रहीम दर-दर फिरैं, माँगि मधुकरी खाहिं
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
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