ठौर-ठौर सरसी में, सरोज प्रगट भए,दसौं दिसि छाड़ै मल, निर्मलता लाई है।फूली फुलवारी जेती, गिरिधारी हुँती सब,मन की मलीनता कूँ, धरा छाड़ि आई है।पहिलै हो आए तैसे, करि कहों न फिरितो,ब्रज ब्रजराज बिनु कहौ कौन भाई है।सरदौंनि रानी आई, बादर गए बिलाइ,दई-दई-दई करै, बरखा बिलाई है॥

